26 September 2021
Age 50
Dear Amit,
पचास।
अब तुम समझने लगे हो कि जिंदगी बहुत लंबी भी लगती है और बहुत छोटी भी।
तुमने बहुत कुछ देखा है।
लोग आए।
लोग गए।
कुछ रिश्ते बचे।
कुछ यादें बचीं।
कुछ पछतावे भी।
लेकिन अब पछतावों के साथ बैठकर मत रहना।
जो हो गया,
वह तुम्हारी कहानी का हिस्सा है।
पूरी कहानी नहीं।
तुम अब पहले से ज्यादा जानते हो।
इसलिए खुद पर थोड़ी नरमी रखो।
तुमने हमेशा सब कुछ सही नहीं किया।
कौन करता है?
तुमने कई बार गलत फैसले लिए।
कई बार सही चीज़ देर से समझी।
कई बार उन लोगों को खुश करने की कोशिश की जिन्हें खुश करना तुम्हारी जिम्मेदारी थी ही नहीं।
अब थोड़ा अपने लिए भी जीना।
काम करो,
लेकिन काम खत्म होने के बाद जिंदगी शुरू होने का इंतजार मत करना।
वही जिंदगी है।
आज की शाम।
आज की चाय।
आज की बातचीत।
आज की हँसी।
आज का सूरज।
आज का परिवार।
आज का सफर।
अब यात्रा पर जाओ।
नई जगहें देखो।
पुराने दोस्तों को ढूँढ़ो।
तस्वीरें खींचो।
कभी अकेले बैठो।
और अपने भीतर की आवाज़ सुनो।
स्वास्थ्य को अब बिल्कुल टालना मत।
जो शरीर पचास साल तुम्हें यहाँ तक लेकर आया है,
उसे तुम्हारा थोड़ा प्यार तो मिलना ही चाहिए।
चलो।
सोओ।
हँसो।
खाओ।
घूमो।
और जब मन करे,
बिना किसी अपराधबोध के आराम करो।
तुम्हें हर समय उपयोगी बने रहने की जरूरत नहीं।
तुम सिर्फ इसलिए भी मूल्यवान हो,
क्योंकि तुम हो।
यह बात पहले समझ लेते तो अच्छा होता।
लेकिन कोई बात नहीं।
अभी भी देर नहीं हुई।
Love,
Amit
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