Saturday, October 24, 2026

Letters Across Time 17 September 2011

 26 September 2011

Age 40

Dear Amit,

चालीस।

यह वह उम्र है जब आदमी पीछे भी देखता है और आगे भी।

तुम सोचोगे,

मैंने क्या पाया?

क्या खोया?

कहाँ सही था?

कहाँ गलती हुई?

कुछ सवालों के जवाब मिलेंगे।

कुछ कभी नहीं मिलेंगे।

उन्हें छोड़ देना।

हर कहानी का अंत समझना जरूरी नहीं होता।

तुम अब समझने लगे हो कि हर लड़ाई लड़ना जरूरी नहीं।

हर बात का जवाब देना जरूरी नहीं।

हर व्यक्ति को समझाना जरूरी नहीं।

और हर रिश्ते को बचाना भी जरूरी नहीं।

यह समझने में तुम्हें समय लगेगा।

लेकिन जब समझ आ जाएगा,

मन थोड़ा हल्का हो जाएगा।

तुम्हारे माता-पिता अब पहले जैसे नहीं रहेंगे।

उनके चेहरे पर समय दिखाई देगा।

उनके साथ बैठना।

उनकी बातें सुनना।

भले ही वही बातें वे दसवीं बार क्यों न सुना रहे हों।

एक दिन तुम्हें उनकी आवाज़ की भी कमी महसूस होगी।

बच्चे बड़े होंगे।

घर बदल जाएगा।

तुम्हारी जिम्मेदारियाँ भी बदलेंगी।

इसलिए हर पड़ाव को जीना।

उसे जल्दी से पार करने की कोशिश मत करना।

तुम अभी भी बहुत कुछ कर सकते हो।

नई जगह जा सकते हो।

नई चीज़ सीख सकते हो।

नया सपना देख सकते हो।

उम्र बढ़ना सपनों की समाप्ति नहीं है।

बस सपनों का अर्थ बदल जाता है।

अब तुम्हें दूसरों को साबित करने से ज्यादा खुद को समझना जरूरी होगा।

और शायद पहली बार तुम यह महसूस करोगे...

कि शांति,

सफलता से ज्यादा खूबसूरत चीज़ है।

इसे संभालकर रखना।

Love,

Amit

No comments:

Post a Comment